मध्यप्रदेश की समग्र आबकारी नीति
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में वर्ष 2017-18 के लिए समग्र आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। नीति के अनुसार नर्मदा किनारे से 5 किलोमीटर की दूरी में स्थित देशी/विदेशी मदिरा दुकानों को बंद किया जाएगा। प्रदेश में इस वर्ष कोई नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी। प्रदेश में हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा पारित आदेश के परिपालन में 572 तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के परिपालन में 1427 दुकानों को हाइवे से 500 मीटर की दूरी पर विस्थापित किया जायेगा। मंत्रि-परिषद के निर्णय अनुसार नर्मदा नदी से पाँच किलोमीटर की परिधि में संचालित 12 जिलों की 58 मदिरा की दुकानों को बंद किया जाएगा। इनमें डिण्डौरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, होशंगाबाद, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, धार तथा खरगोन जिलों की 39 देशी और 19 विदेशी मदिरा दुकानें शामिल हैं।
नीति के तीन भाग
— मद्य संयम
— राजस्व संग्रहण
— ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में विभाजित है।
नीति की खास विशेषताएं
— समाज में मदिरापान की प्रवृत्ति पर संयम के लिए जागरूकता की दृष्टि से प्रदेश में विभिन्न आयोजन एवं सेमीनारों सहित नशामुक्ति के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसमें योग और मेडिटेशन थैरेपी सेंटर, मद्य सेवन से होने वाली बीमारियों की जानकारी देने और सोशल मीडिया के साधनों का उपयोग करना शामिल है।
— वर्ष 2017-18 के लिए होलोग्राम में अत्याधुनिक फीचर जोड़े जायेंगे। होलोग्राम की डुप्लीकेसी की संभावना को रोकने के लिए एसएमएस अलर्ट का प्रावधान रखा गया है। इसमें मदिरा के वैध स्त्रोत की जाँच की व्यवस्था भी है।
— मद्य संयम के अंतर्गत व्यसन मुक्ति के लिए सेमीनार आयोजित करने के साथ-साथ स्कूल, कॉलेज के पाठयक्रम में मादक पदार्थो के सेवन से हानि के संबंध में जागरूक करने के लिए भी व्यवस्था की जायेगी।
— नीति में नशा करके ड्रायविंग करने पर प्रथम बार छ: माह तथा दूसरी बार दो वर्ष के लिए ड्रायविंग लायसेंस निलंबित करने का प्रावधान भी रखा गया है। तीसरी बार में ड्रायविंग लायसेंस निरस्त करने के लिए परिवहन विभाग को लिखा जाएगा।
— मदिरा दुकानों के बोर्ड और मदिरा की बोतलों के लेवल पर मदिरा पान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने संबंधी वैधानिक चेतावनी प्रमुखता से अंकित की जाएगी। ड्रंकननेस को क्रिमिनल जिम्मेदारी के विरुद्ध एक डिफेंस की तरह उपयोग करने वाली आईपीसी की धारा 184 में सुधार के लिए राज्य अमेंडमेंट का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जाएगा।
— नीति में थानों पर आबकारी के आदतन अपराधियों और दुकानों पर आदतन ग्राहकों की सूची रखने की व्यवस्था रखने का प्रावधान भी है।