जब पढने में नहीं लगे मन

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 प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों का समय पढने लिखने में ही व्यतीत होता है. कभी-कभी ये भी होता है कि व्यक्ति पढने में इस तरह डूब जाता है कि उसे दीन-दुनिया की कोई खबर नहीं रहती. कई बार एक ही कमरे में बैठे-बैठे कब दिन डूबा और कब सुबह हुई इसका अहसास भी नहीं होता. बंद कमरे में खिड़की न हो तो आपका क्या हाल होता है? कभी सोचा है? चारों ओर घुटन सी महसूस होती है. हवा पाने को मन बेताब हो जाता है. और जब ठंडी ताज़ी हवा का झोंका आता है तो मन खुशनुमा हो जाता है. भीतर तक ताजगी का एहसास तन-मन को निर्मल कर जाता है. 

ऐसा ही कुछ हमारे मस्तिष्क के साथ भी है. एक ही एक तरह का काम करके यह भी थक जाता है और निढाल पड जाता है. हमारा मस्तिष्क अलग-अलग तरह से सोचने और काम करने के लिए विकसित है. जब हम एक ही तरह का काम करते हैं तो यह थक जाता है और उसकी क्षमता भी उतनी नहीं रहती. जब क्षमता उतनी नहीं रहेगी तो काम भी कुशलता के साथ नहीं हो पायेगा. तो क्या किया जाए? जवाब आसन है. मस्तिष्क को तरोताजा बनाए रखने के लिए खिड़की खोलकर ताज़ी हवा के झोकों का प्रवेश करवाइए. कुछ ऐसा काम करिए जिससे मन मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठे और कुछ समय बाद फिर से दुगुने उत्साह से काम करने को तैयार हो जाए. 
 
इसके लिए आपको अपनी अभिरुचियों का सहारा लेना होगा. आपको लग रहा है कि पढ़ते-पढ़ते बहुत हो गया और अब दिमाग थक चुका है तो पुस्तक बंद कर दीजिए. अब समय है एक अंतराल का, अपने आपको आराम देने का. यदि आपको साहित्य पढने का शौक है तो पसंद की कोई साहित्यिक पुस्तक लेकर बैठ जाइए. लेखन में रूचि है तो किसी भी विषय पर कुछ लिखने का प्रयास करिए. संगीत में रूचि है तो गाना गाइए. या नृत्य में आनंद आता है तो वो ही कर डालिए. पेंटिंग, कलाकारी, चित्रकारी, अभिनय कुछ भी जिसमें आपको मज़ा आता हो वह काम थोड़ी देर के लिए करिए. यकीन मानिए ये सब करने के बाद आपको बहुत तरोताजा महसूस होगा. आप ताज़गी से भर जाएँगे. फिर जब ब्रेक के बाद आप फिर अपनी पढ़ाई पर लौटेंगे तो नई ताजगी और ऊर्जा महसूस करेंगे. 
 
वास्तव में संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है. परिवर्तन होता रहता है तो उत्साह बना रहता है. इस परिवर्तन को बनाए रखने के लिए अभिरुचि तो एक सशक्त माध्यम है ही, साथ ही आप अलग-अलग विषय पढ़कर भी इस समरसता को तोड़ सकते हैं. जैसे आप इतिहास पढ़कर थकान महसूस करने लगे हैं तो खेल सम्बंधित जानकारी पढ़िए या विज्ञान की रोचक बातें पढ़िए. इससे आपका ज्ञानवर्धन भी होगा और दिमाग को एक परिवर्तन मिलेगा. वैसे दिमाग को भी कसरत कराते रहना चाहिए. वह कैसे करना है इस बारे में, दिमागी कसरत के बारे में एक लेख अलग से दिया जाएगा. फिलहाल तो आप अपनी अभिरुचि में रूचि बनाये रखिए. जिससे दिमाग के द्वार खुले रहें और ताज़ी बयार आती-जाती रहे.

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