कैसे तैयार करें अपने नोट्स
effective notes for exam
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए यह तो हमें अलग-अलग तरह के स्त्रोतों से पता चल जाता है. लेकिन परीक्षा के लिए तैयार होने वाले नोट्स किस तरह से बनाएं जाएं? इस बात को लेकर हमेशा दुविधा की स्थिति बनी रहती है. कई बार नोट्स तैयार कर लिए जाते हैं फिर बाद में एहसास होता है कि ये व्यवस्थित नहीं बन पाए.
इन्हीं परिस्थितियों से उबरने के लिए आपको बताया जा रहा है कि आप कहाँ से शुरुआत करें. और कौन सी प्रक्रिया अपनाएं. सबसे पहली बात यह है कि आप ज्यादा पुस्तकें खरीदने में विश्वास न रखें. आपको लगता है कि किसी पुस्तक का आपके पास व्यक्तिगत रूप से होना जरुरी है तो ही उसे खरीदें. फिर आप कहेंगे कि बिना पुस्तक के नोट्स किस तरह बनेंगे भला?
पुस्तकालय की सहायता
इसका उत्तर है कि आप शहर के किसी अच्छे पुस्तकालय की सदस्यता ले लें. जहाँ बैठकर पढने की भी सुविधा हो. इससे दो बातें होंगी-आपको सामग्री चयन में अधिक पैसा नहीं लगाना पड़ेगा. दूसरी बात आपको वहाँ पढने वालों का समूह मिल जाएगा. जिनसे आपको न सिर्फ कम्पनी मिलेगी बल्कि आप उनसे सामग्री के बिन्दुओं पर चर्चा भी कर सकते हैं. आप आपस में पुस्तकों का आदान-प्रदान भी कर सकते हैं.
पहले पढ़ें फिर लिखें
अब आप विषय से सम्बंधित अच्छी पुस्तकों को निकालकर पढ़ना शुरु करें. याद रखें पढना ही शुरु करना है, अभी लिखने की शुरुआत नहीं करनी है. सभी पुस्तकों में से एक ही अध्याय पढ़िए. उनमें कुछ बातें एक सी रहेंगी और कुछ बिंदु अलग होंगे. विषय पर अधिकांश पुस्तकों को पढ़ डालिए. इससे विषय के बारे में आपकी समझ बिलकुल स्पष्ट हो जाएगी और पकड़ मजबूत होगी.
कौन,कहाँ, कैसे, कब, और क्यों से करें शुरु
अब आप पुस्तकालय में ही बैठकर पहले विषय की बेसिक बातों को नोट कर लिख लें. इसके लिए आप "कौन,कहाँ, कैसे, कब, और क्योँ" जैसे प्रश्नों का आधार बनाकर शुरुआत करें. अलग-अलग पुस्तकों में दिए विशेष बिन्दुओं को भी अलग पन्ने पर लिख लीजिए. ये आपके कच्चे नोट्स तैयार हो रहे हैं. अब आप कच्ची सामग्री में से बिन्दुओं को छांट-छांटकर अपनी हैडिंग में फिट करते जाइए. यानी आप विषय को छोटे टुकड़ों में बाँट कर क्रम से लिखें. जैसे पहला बिंदु होगा इंट्रोडक्शन का. फिर उस विषय का इतिहास या इतिहास से सम्बन्ध. फिर विशेषताएं, फिर आर्थिक, सामजिक, राजनितिक भौगोलिक विशेषताएं, वर्तमान से उसका जुड़ाव और भविष्य पर प्रभाव आदि-आदि और अंत में कांक्लूजन. इतना एक विषय पर आपको लिखना ही है.
सिनोप्सिस है मददगार
इन हेडिंग से बनाया गया सिनोप्सिस आपके पहले पन्ने पर लिखा होगा, उससे बाद में आपको विषय दोहराव में बहुत सहायता मिलेगी. एक बार सिनोप्सिस पढ़ लेने से पूरे उत्तर का संक्षेप में दोहराव हो जाता है, और इससे आपको क्रम भी मिलता है कि किस बिंदु के बाद कौन सा बिंदु लिखना है. इस तरह से ये न सिर्फ याद करने के लिए बल्कि लिखने के लिए भी सहायक होगा. याद रखिये सभी नोट्स अलग-अलग पन्नों में लिखना है किसी कापी में नहीं. उन्हें आप अभी के लिए स्टेपल कर लें. बाद में कुछ जोड़ना हो तो आप उसमें पन्ना जोड़कर ऐड कर सकते है. मान लीजिए आपने बाँध के विषय में नोट्स तैयार किए हैं और किसी बाँध की ऊँचाई को लेकर कोई फैसला या वर्तमान में कोई चर्चा है तो आप एक पन्ने पर उसे लिखकर अपने नोट्स में शामिल कर लीजिए. नोट्स बनाने की इस प्रक्रिया को अपनाने का दूसरा फायदा यह है कि आप किसी भी ऐसे विषय पर भी टिपण्णी लिख सकते हैं जिसकी आप अल्प जानकारी रखते हों.
इस तरह से आपको नोट्स बनाने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी हो गई है. इसको अपनाते हुए जल्दी से शुरु हो जाइए.
मार्गदर्शन