यह करें तो हमेशा उत्तर रहेंगे याद
memory, mppsc preparation
दोस्तों, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जनरल नॉलेज का बोलबाला हो गया है। तथ्य बहुत से हैं और
उन्हें सही-सही याद भी रखना है। ऐसे में आप परेशान हैं कि सारे तथ्यों को एक साथ याद कैसे रखें कि
लम्बे समय तक आपकी याददाश्त में वे तथ्य बने रहें|
मनुष्य के मस्तिष्क की विशेषता है कि किसी भी तथ्य को ताज़ा-ताज़ा देखने सुनने पर याद रखता है।
फिर धीरे-धीरे उनकी स्मृति धुँधली पड़ती जाती है। ये एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। यदि ऐसा न हो तो कई
अनहोनी घटनाएं हमें याद रह-रहकर तकलीफ देती रहेंगी। परन्तु साथ ही कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें
हम बराबर याद रखना चाहते हैं, जिन्हें हम बार-बार याद रखना चाहते हैं उनके लिए हमें अपने मस्तिष्क
को याद दिलाते रहना पड़ेगा। इस बारे में हम आपको एक रोचक तथ्य बताते हैं। जो लोग रोज किसी
धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करते हैं जैसे दुर्गा चालीसा या हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं उन्हें वह पढ़कर
इतनी अच्छी तरह कंठस्थ हो जाती है कि फिर पुस्तक देखने की आवश्यकता नहीं रह जाती। आपकी
जुबान उसको बोलती चली जाती है और दिमाग आगे-आगे बोलता रहता है। और तो और आपको किस
पन्ने पर कौन सी लाइन लिखी है ये भी आँखों में, बिना किताब देखे ही दिखता है।
आपके पाठ्यक्रम की कुछ सामग्री स्थायी है। जिसमें कभी न बदलने वाले तथ्य हैं, जिन्हें आपको वैसे
का वैसा ही याद करना है। अतः अपने पाठ्यक्रम के स्थायी तथ्यों को एक स्थान पर लिख लें। जैसे
इतिहास की सामग्री एक रजिस्टर में, दूसरे रजिस्टर में संविधान से सम्बंधित तथ्य लिख लें। इस प्रकार
पहले एकदम सही-सही तथ्यात्मक जानकारी जुटा लें। फिर इसके बाद रोज इसको दोहराने का क्रम
निर्धारित करें। दोहराने का क्रम भी तय कर लें। जैसे आपने तय कर लिया है कि मै सबसे पहले भूगोल
को दोहराऊंगा। तो पहले भूगोल फिर इतिहास फिर संविधान। इस प्रकार इसी क्रम को रोज बनाए रखें।
शुरू में इसमें आपको समय लगेगा लेकिन धीरे-धीरे इसमें लगने वाला समय कम होता चला जाएगा।
शुरु में इसमें यदि दो घंटा लग रहा होगा तो बाद में आधे घंटे में ये दोहराव की प्रक्रिया संपन्न हो जायेगी।
और आपको मानसिक संतुष्टि भी रहेगी कि आपने अपने कोर्स का तथ्य्परक भाग दोहरा लिया है।
परन्तु इस प्रक्रिया के साथ कठिनाई भी है। जितना आसान लग रही है वैसी है नहीं। इसमें सबसे बड़ी
बाधा है आपका अपना व्यवहार। वास्तव में इसके साथ एक कठिनाई यह रहेगी कि दो दिन के दोहराव के
बाद ही आप बोर हो जाएंगे और आपका मन आपको बार-बार कहेगा कि अरे यार एक ही एक बात
पढ़कर समय खराब क्योँ करना? पर आपको मन की बात पर ध्यान न देकर जी कड़ा करके दोहराव की
इस प्रक्रिया को बनाए रखना है। किसी भी कीमत पर मन की बोरियत पर ध्यान नहीं देना है।
हाँ यह बात भी ध्यान में रखना है कि आपको इन तथ्यों का रट्टा नहीं मारना है। बस साधारण से अंदाज़
में पढना है। ध्यान से, रोज पढना है। रोज यानी रोज। पहले दिन से परीक्षा के दिन तक बिना नागा। इस
तरह से पढ़े हुए तथ्य सदा आपके साथ रहेंगे और बिना किसी शंका और संदेह के आप भरोसे के साथ
इन्हें याद रख सकेंगे। ये प्रक्रिया थोड़ी कठिन और उबाऊ तो है लेकिन है सौ प्रतिशत कारगर। सफल
अभ्यर्थियों के द्वारा आजमाई हुई है।
जब भी पढने बैठें गणेश वंदना की तरह आपको इनसे ही शुरुआत करनी है। जोर-जोर से पढने से लेकर
बिना देखे बोलने की स्थिति आने तक आपको गणेश वंदना का साथ नहीं छोड़ना है। इसे एक बार पढने
के बाद बंद कर दीजिए फिर पूरा दिन कुछ भी याद करते रहिये। लेकिन दूसरे दिन आपको फिर इसी से
शुरुआत करनी है। यह आजमाई हुई तकनीक है इसे उपयोग में लेकर आप निश्चित ही सफलता की ओर
अग्रसर होंगे।