नर्मदा में अज़ोला का कहर
नर्मदा नदी मेंप्रदूषण
नर्मदा नदी में एजोला वनस्पति संकेत दे रही है कि नदी की सेहत ठीक नहीं है| नदी की सतह पर तैरती हरी परत बढती ही जा रही है मानों नदी खुद अपनी दुर्दशा की कहानी सुना रही हो|
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिए है कि मामले की जाँच के लिए तत्काल समिति का गठन किया जाए| जिसकी रिपोर्ट 17 अप्रैल तक आ जानी चाहिए| जाँच के लिए बनी समिति में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नोडल आफिसर होंगे| अन्य सदस्यों में जे एन के विवि के दो प्रोफ़ेसर कृषि पालन विभाग के अधिकारी, बायो विविधता विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे| मत्स्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव भी इसमें शामिल होंगे| जबलपुर से लेकर खंडवा तक एजोला वनस्पति की समस्या सबसे अधिक है| इस समस्या का कारण प्रदूषण ही माना जा रहा है| नर्मदा किनारे स्थित डेरियां ज्यादा प्रदूषण फैला रहीं हैं| नरसिंहपुर के ग्राम हीरापुर के लोगों ने अरहर की फसल के अवशेषों सूखे तनों और तार से जाल बनाए और हिरन नदी के मुहाने पर लगा दिए जिससे नर्मदा नदी की ओर बहकर आ रहे एजोला वनस्पति पर रोक लगी|
एज़ोल्ला एक प्रकार की खरपतवार है जो TERIDOPHYTA समूह की है| यह कम तापमान ठण्ड के मौसम में होती है| नदी की ऑक्सीजन को तेज़ी से ख़त्म करती है और इसीलिए हानिकारक है| वर्षा के मौसम में तेज़ी से बहते पानी के कारण इनका ठहराव नहीं हो पाता| ठण्ड का मौसम शुरू होते ही वृद्धि होने लगती है जो तापमान बढ़ते ही बढती जाती है| नदी के किनारों पर प्रदूषण जितना बढेगा इस खरपतवार की बढ़ोतरी होगी| इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि नदी प्रदूषित हो रही है| एल्गी एक प्रकार के बायो इंडीकैटर हैं| जो प्रदूषित या अप्रदूषित पानी में पाए जाते हैं| और इसी कारण से इन्हें पानी की गुणवत्ता का निर्धारण करने में उपयोगी माना जाता है| वास्तव में एल्गी की वृद्धि सूर्या के प्रकाश और पानी में उपस्थित पोषक तत्वों पर निर्भर करती है| दरअसल साफ़ पानी में बहुत सारे जीव एकसाथ रहते हैं लेकिन प्रदूषित पानी में कुछ ही जीव रहते हैं जिनमें से एक या दो प्रभावी रूप से पानी पर छा जाते हैं| पानी के तापमान, पीएच और पानी में घुले तत्वों पर निर्भर करता है कि एल्गी की वृद्धि कैसे होगी|
नर्मदा नदी में जिग्नेमा प्रकार की एल्गी पाई जाती है जो साफ़ पानी की एल्गी है| पानी का प्रदूषण इनके लिए उर्वरक का काम करता है| और ये पानी की आक्सीजन को तेज़ी से सोखती हैं|