नर्मदा सेवा यात्रा
narmada seva yatra
"नमामि देवि नर्मदे" नर्मदा सेवा यात्रा मॉ नर्मदा नदी के उदगम स्थल अमरकंटक से दिनांक 11 दिसम्बर, 2016 से प्रारंभ होकर अलीराजपुर के सोण्डवा से वापस होते हुये अमरकंटक में दिनांक 11 मई, 2017 को 144 दिवसीय यात्रा का समापन होगा। यात्रा दक्षिणी तट पर 1831 किलोमीटर एवं उत्तरी तट 1513 किलो मीटर होगी। यात्रा दक्षिणी तट पर 548 ग्रामों/कस्बों एवं उत्तरी तट पर 556 ग्रामों/कस्बों, कुल 1104 ग्रामों/कस्बों से होकर निकलेगी। इस प्रकार यह यात्रा कुल 3344 किलो मीटर की रही| नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प के साथ उद्गमस्थल अमरकंटक से रविवार को नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा शुरू हुई . यात्रा की शुरुआत से पहले नर्मदा नदी को प्रतीकात्मक रूप से चुनरी ओढ़ाई गई और कलश यात्रा निकली गई।
शुभारंभ कार्यक्रम में महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, चिन्मयानंद स्वामी, बाबा कल्याण दास, देव प्रभाकर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह कार्यवाह भैया जी जोशी, स्टॉक होम वॉटर प्राइज से सम्मानित राजेंद्र सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी उपस्थित थे|
मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों केा नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ नदी के दोनों ओर पौधरोपण का संकल्प दिलाया.
नर्मदा नदी भारत की पांचवी बड़ी नदी और भारतीय प्रायद्वीप की प्रमुख नदी है| नदी का उद्गम मैकल पर्वत शिखर से अमरकंटक में होता है| इसीलिए इसे मैकलसुता भी कहा जाता है| नदी की समुद्र तल से ऊँचाई 3500 फुट है तथा नदी की लम्बाई 1310 किमी है| नर्मदा नदी का अपवाहक्षेत्र 36,000 वर्ग मील है जिसमें 1003 गाँव पड़ते हैं| यानी नदी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जीवन प्रदान करती है| घाटों की संख्या 1107 हैं| नदी के प्रवाह में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रेणियां आती हैं| नदी का बहाव विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच पश्चिम दिशा में है|
प्रमुख सहायक नदियाँ - हिरन, तेन्दोनी, बारना, कोलार, मान, उरी,ओरसंग, बुढ़नेर, बंजर, शेर, शक्कर, दुधी, तवा, गंजाल, तवा, छोटा तवा, कुन्डी, गोई, करजन, वेदा, सुक्ता प्रमुख सहायक नदियाँ 21 हैं|