सीरिया का संकट
Syria crisis
सीरिया में जिस तरह के हालत चल रहे हैं उससे लग रहा है कि इस पुरातन शहर का विनाश सुनिश्चित है| सीरिया का विनाश एक सभ्यता का विनाश है| सीरिया एक ऐसा देश है जहाँ विश्व सभ्यता के इतिहास की धरोहर मिलती है| इसकी परंपरा यहूदियत, ईसाइयत और इस्लाम के पूर्व के दौर में ले जाती है| सीरिया के शहर अलेप्पो, दमिश्क का उल्लेख हिब्रू बाइबिल, ओल्ड और न्यू टेस्टामेंट के अलावा कुरआन शरीफ में भी मिलता है| ये शहर जुडो-क्रिश्चियन परंपरा के शहर हैं| पामिरा, बाल शामीन, जोबार, यहूदी मंदिर, बोसरा शहर सब ध्वस्त हो रहे हैं| दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सीरिया का गृहयुद्ध दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी मानी जा रही है| सीरिया के पश्चिम भाग में अलवाई शियाओं का कब्जा है जो राष्ट्रपति बसर-अल-असद के पक्ष में हैं जबकि उत्तर पूर्व में कुर्दों का दबदबा है और मध्य में सुन्नी इस्लामिक गुट इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा से जुड़े जब्हत-अल-नुसरा का कब्ज़ा है|
राष्ट्रपति असद का मानना है कि पश्चिम देशों की आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति और फिर उसे खत्म करने का दिखावा ही इसके लिए जिम्मेदार है| अस्सी के दशक में पश्चिम देशों ने अफगान आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया| और 2006 में ईराक में उनकी शह पर इस्लामिक स्टेट को खड़ा होने दिया| अब अमेरिका और नाटो के सदस्य आतंकवादियों के सफाए के नाम पर सीरिया में बमबारी कर रहे हैं, जिससे निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं|
सीरिया का समाज छोटे -छोटे कबीलों में बंट गया है| इरान और रूस असद सरकार का समर्थन कर रहे हैं तो अमेरिका के समर्थन वाले सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, सुन्नी गुटों के साथ हैं| मध्य में इस्लामिक स्टेट का सफाया करने के नाम पर अमेरिका और नाटो के देश बमबारी कर रहे हैं जो वास्तव में असद समर्थकों का सफाया करने के लिए है| रूस द्वारा असद विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन अंत में सभी मिलकर सीरिया की विरासत और सभ्यता का ही सफाया कर रहे हैं| निर्दोष सीरियाई लोगों को यूरोपियन देश शरणार्थियों के रूप में अपने देश में लेने को तैयार नहीं हैं| यूरोप की जनता भी इसके लिए तैयार नहीं है|
सीरिया को गृहयुद्ध की आग में जलते हुए पांच वर्ष हो चुके हैं| इसका खामियाजा निर्दोष लोग झेल रहे हैं| सीरिया का समाज बुरी तरह विभाजन और नफरत का शिकार हो चुका है| शिया-सुन्नी विरोध, इस्लामिक स्टेट की कट्टर धर्मान्धता और तानाशाही जैसी शासन पद्धति के खिलाफ रोष उबल रहा है|
गृहयुद्ध के हालात
सीरिया में आज गृहयुद्ध के हालात हैं जिसे हम सीरियाई संकट भी कह सकते हैं| इसका मुख्य कारण है 1963 से चले आ रहे "बाथ पार्टी" के शासन का अंत करने के लिए पार्टी विरोधियों का विद्रोह| विरोधियों की प्रमुख माँगों में से एक माँग है राष्ट्रपति बशर अल असद का पद से त्याग पत्र, जो कि 1971 से सत्ता में हैं| अप्रैल 2011 की क्रान्ति के बाद सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई| विपक्ष में कुछ नागरिक और विरोधी सैनिक हैं| सरकार और आम नागरिकों या सेना और विरोधियों के संघर्ष के कारण गृहयुद्ध की स्थिति बन गयी है|
2011 के अंत तक इस्लामी संगठन जब्हत-अल-नुसरा का प्रभाव बढ़ गया था| इसके बाद सीरियाई सेना के पक्ष में हिजबुल्ला ने 2013 में युद्ध में प्रवेश किया| सीरियाई सेना को रूस और ईरान से समर्थन प्राप्त है जबकि विद्रोहियों को सऊदी अरब और क़तर से हथियार भेजे जा रहे हैं| हालात यह हैं कि विद्रोहियों के नियंत्रण में देश का उत्तर और पूर्व का हिस्सा है| देश का मात्र 40 प्रतिशत भाग ही सीरियाई सरकार के पास है|
अमेरिका, अरब लीग और यूरोपीय संघ एवं कई अन्य देशों ने विद्रोहियों पर हिंसा का विरोध किया है| इसी कारण के चलते सीरिया को अरब संघ से भी निकाल दिया गया और सरकार विरोधी सीरियाई राष्ट्रीय गठबंधन को 6 मार्च 2013 में संघ का सदस्य बनाया है|
कौन किसके पक्ष में
अपने-अपने राजनीतिक और व्यापारिक हितों के अनुसार देश सीरिया के गृहयुद्ध में सरकार या सरकार विरोधियों का समर्थन कर रहे हैं जिससे स्थितियाँ और भी जटिल होती जा रही हैं| इस संकट में आईएसआईएस की भूमिका से पूरी दुनिया चिंतित है। इस युद्ध में आक्रमण को लेकर देश दो गुटों में बंट गए हैं| एक तरफ रूस है जो सीरिया और इराक के पक्ष में है तो दूसरी तरफ अमेरिका और उसके साथ ब्रिटेन, तुर्की समेत बाकी पश्चिमी देश हैं। स्पष्ट है दिखाई दे रहा है कि एक बार फिर शीत युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं|
रूस और ईरान बशर-अल-असद के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि वो सीरिया के राष्ट्रपति बने रहें| रूस बशर-अल-असद के विरोधियों पर बम बरसा रहा है जबकि अमेरिका और पश्चिम देश राष्ट्रपति का तख्ता पलट करवाना चाहते हैं| सीरिया के मामले में पूरी दुनिया दो खेमों में बंट गयी है| रूस के निचले सदन ड्यूमा ने सीरिया के साथ समझौता करके रुसी वायु सेना की अनिश्चित काल के लिए सीरिया में तैनाती को मंजूरी दी गयी|
सऊदी अरब एक सुन्नी बहुल देश है और बशर-अल-असद को हटाने के लिए अमेरिका के हस्तक्षेप का समर्थक है| अमेरिका आइएस आइएस के विरोध के बहाने से सऊदी अरब के साथ है|
तुर्की भी असद विरोधी है रूस ने जब असद के विरोधियों पर बम बरसाने के लिए विमान भेजा तो तुर्की ने विमान गिराकर यह सन्देश दिया कि वो असद को हटाने के लिए कुछ भी कर सकता है| सीरिया से सबसे अधिक शरणार्थी तुर्की में जाकर रुके हुए हैं|
ईरान सीरिया के राष्ट्रपति की सत्ता को बनाये रखने के लिए अरबों डालर खर्च कर रहा है| सीरिया की सरकार को बेहद कम दरों पर सैन्य सलाहकार, हथियार, पैसा, तेल और रसद उपलब्ध करा रहा है| दुनिया को दिखने के लिए तर्क दे रहा है कि सीरिया स्थित शियाओं के पवित्र स्थल की रक्षा करना ही उसका मुख्य उद्देश्य है| ईरान, लेबनान में शिया इस्लामी आन्दोलन हिजबुल्लाह को हथियार पहुंचाने का काम करता आया है और सीरिया होते हुए ही यह सहायता पहुंचती है| हिजबुल्लाह के लड़ाके भी ईरान के कहने पर सीरिया आकर युद्ध में शामिल हो रहे हैं| ईरान का मानना है कि देश की सरकार को कमज़ोर करके आतंक का सामना नहीं किया जा सकता|
चीन इस मामले में गुप्त रूप से असद सरकार को सहायता पहुंचा रहा है ऐसा माना जाता है| रूस को समर्थन देकर चीन अमेरिका और अन्य पश्चिम देशों को यह बताना चाहता है कि सीरिया के शासन में अस्थिरता का प्रभाव चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा| और मध्य पूर्व के देशों से आने वाले तेल आदि की आपूर्ति बंद होने से चीन को दिक्कतों का सामना करना पड सकता है|
ब्रिटेन भी राष्ट्रपति को हटाने के पक्ष में है| उसका मानना है कि सीरिया में शासन द्वारा कई निर्दोष लोगों पर अत्याचार करने और हत्या करने की जिम्मेदार है| पेरिस हमले के बाद ब्रिटेन ने आइएस आइएस के विरोध में मोर्चा खोल दिया है|
जर्मनी की चांसलर अंजेला मार्कर असद के पक्ष में हैं उनका मानना है कि सीरिया शरणार्थियों की समस्या असद शासन ही दूर कर सकता है|
भारत का रूख
भारत अपना पक्ष सुरक्षा और ऊर्जा की आवश्यकता से जोड़कर पूरी दुनिया के सामने रखता आया है| गुटनिरपेक्ष नीति के चलते भारत किसी भी गुट विशेष के साथ न होकर अपनी राय खुलकर रखता आया है| भारत की नीतियों के अनुसार सीरिया संकट, सरकार और विरोधियों की आपसी बातचीत से ही हल हो सकता है| वैसे भारत बशर-अल-असद की सरकार के पक्ष में इसलिए है कि यह किसी देश की संप्रभुता का मामला है और देश में ही हल होना चाहिए| अतः भारत की नीति मामले पर चुप्पी की है|
वर्त्तमान हालात
8 अप्रैल 2017 अमेरिका ने टॉम हाक मिसाइल से सीरिया पर हमला किया इस एक हमले में 6 अरब डालर का खर्च आया है| सीरिया में असद समर्थकों द्वारा केमिकल अटैक के तीन दिन बाद अमेरिकी नौसेना ने यू एसएस पार्टर और यू एसएस रोस से शयारत एयर बेस पर 59 टॉम हाक मिसाइल से हमला किया| इस हमले का असर अधिक नहीं आँका गया क्योकि हमले कुछ घंटों बाद ही सीरिया के युद्धक विमानों ने इसी हवाई अड्डे से उड़ानें भरी और खान शेखुन इलाके में बमबारी की| अमेरिका की सीरिया पर यह पहली प्रत्यक्ष कार्रवाई है|
जब सन 2011 से असद सर्कार के खिलाफ विरोध की शुरुआत हुई तब से ही सीरिया पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग का आक्षेप लगता रहा है| कभी सेरिन तो कभी क्लोरिन गैस के जानलेवा हमलों के बाद सीरिया ने रासायनिक हथियार निषेध संधि पर हस्ताक्षर भी किये लेकिन फिर भी केमिकल हथियारों का प्रयोग जारी रखा| इस का नतीजा अमेरिका की ताज़ातरीन कार्रवाई है जिससे विश्व युद्ध जैसे हालत पैदा हो गए हैं|
तेल उत्पादक मध्य पूर्व में अस्थिरता का माहौल बन जाने से तेल की कीमतों में वृद्धि हो गयी है| हांलांकि सीरिया ही एकमात्र तेल उत्पादक देश नहीं है लेकिन इसके हर्मुज खाड़ी के नजदीक होने से यहाँ से लाखों बैरल तेल भेजा जाता है| विभिन्न देशों को तेल भेजने का केंद्र होने से यहाँ की अस्थिरता काफी अर्थ रखती है|
यह भारत का 100 वां एअरपोर्ट है और सिक्किम का पहला. यह ऊँचाई पर बना भारत के पांचवें एअरपोर्ट में से एक है. यह भारत चीन सीमा से 60 किमी की दूरी पर स्थित है. इस एअरपोर्ट के बनने के पहले सबसे निकटतम एअरपोर्ट पश्चिम बंगाल का बागडोगरा एअरपोर्ट 124 किमी की दूरी पर था. यह गंगटोक के दक्षिण में 35 किमी की दूरी पर स्थित है. इसका उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 सितम्बर 2018 को किया.
मध्यप्रदेश में 23 सितम्बर से आयुष्मान भारत योजना लागू हो गई है। प्रदेश में यह योजना आयुष्मान मध्यप्रदेश निरामयम् के नाम से लागू की गई है। योजना से प्रदेश के लगभग 1 करोड़ 37 लाख परिवारों को हर साल 5 लाख रूपये का नि:शुल्क कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिल गया है।
राज्यसभा में पारित होने के बाद लोकपाल विधेयक १८ दिसंबर को लोकसभा में भी पारित हो गया है। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून के रूप में सामने आ जाएगा।लोकपाल के दायरे में एक मामूली सरकारी कर्मचारी से लेकर प्रधानमंत्री तक को लाया गया है।
भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है भारत रत्न। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी।
सीरिया में आज गृहयुद्ध के हालात हैं जिसे हम सीरियाई संकट भी कह सकते हैं| इसका मुख्य कारण है 1963 से चले आ रहे "बाथ पार्टी" के शासन का अंत करने के लिए पार्टी विरोधियों का विद्रोह| विरोधियों की प्रमुख माँगों में से एक माँग है राष्ट्रपति बशर अल असद का पद से त्याग पत्र, जो कि 1971 से सत्ता में हैं|
बंगाल की खा़डी में 11 अक्टूबर 2013 को उठे उष्णकटिबंधीय चक्रवात को फेलिन नाम दिया गया है। फेलिन का अर्थ सफायर (नीलम) होता है। ये शब्द थाइलैंड का है। जापान के मौसम विज्ञान विभाग ने 4 अक्टूबर को इसे थाइलैंड की खाड़ी में मॉनिटर करना शुरू किया। इसके बाद पश्चिमी पैसिफिक बेसिन होता हुआ अंडमान सागर पहुंचा।