मध्यप्रदेश में कुटीर एवं ग्रामोद्योग की गतिविधियां

Cottage and village industry activities in Madhya Pradesh

 बंगलुरू, बनारस, कलकत्ता, हैदराबाद, नासिक और भागलपुर से रेशम धागा और अन्य सामग्री खरीदने के लिये आने वाले व्यापारियों की सुविधा के लिये होशंगाबाद के समीप मालीखेड़ी में इस वर्ष से केन्द्रीय भंडार शुरू किया गया है। अब प्रदेश के 8 ककून बैंक और 5 यार्न बैंक की सामग्री एक स्थान पर उपलब्ध हो गई है। उन्होंने बताया कि 10 हजार से अधिक परिवार को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में स्थापित कराया गया है।

 

ई-रेशम पोर्टल पर पंजीयन सुविधा

 

किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ने के लिये ई-रेशम पोर्टल पर पंजीयन की सुविधा प्रदान की गई है। इस पोर्टल पर किसान 20 दिसम्बर तक पंजीयन करवा सकते हैं। श्री यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा और सागर में रेशम कार्यालय शुरू किये गये हैं। छिन्दवाड़ा, इंदौर, नरसिंहपुर और बैतूल जिले में रेशम धागाकरण की इकाइयों के लिये 4 नई रीलिंग मशीन लगाने की कार्यवाही शुरू की गई है।

 

उपभोक्ताओं के लिये अमेजन पर मृगनयनी

 

नवाचार के अन्तर्गत उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिये मृगनयनी की वेबसाइट के साथ ही अमेजन के माध्यम से उपभोक्ता सुविधा प्रारंभ की गई है। मृगनयनी उत्पादों के विक्रय के लिये एफ.एम. रेडियो और सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जा रहा है। भोपाल के गौहर महल के साथ ही अर्बन हाट इंदौर और शिल्प बाजार ग्वालियर में भी सकारात्मक गतिविधियाँ प्रारंभ की गईं हैं। पहली बार जबलपुर में नेशनल हैण्डलूम एक्सपो लगाया जा रहा है।

 

राष्ट्रीय फैशन संस्थान के विद्यार्थियों के लिये राष्ट्रीय योजना

 

मृगनयनी एम्पोरियम से राष्ट्रीय फैशन संस्थान के विद्यार्थियों को जोड़ने के लिये उनकी डिजाइन स्वीकृत होने पर उन्हें रायल्टी देने की योजना शुरू की गई है। लंदन में अप्रैल 2020 में मृगनयनी प्रदर्शनी लगाने का निर्णय लिया गया है। मृगनयनी ने पहली बार उच्च श्रेणी और गुणवत्ता के वैवाहिक वस्त्रों के उत्पादन और विपणन के लिये चन्देरी और महेश्वर के बुनकरों को प्रोत्साहित किया है। इस वर्ष हैदराबाद (आन्धप्रदेश) केवडिया (गुजरात) और रायपुर (छत्तीसगढ़) में मृगनयनी केन्द्र खोलने का निर्णय लिया गया है। सागर और छिन्दवाड़ा में नये मृगनयनी शोरूम शुरू करने की कार्यवाही अंतिम चरण में है। होशंगाबाद और बैतूल में इसी वर्ष मृगनयनी के विक्रय केन्द्र शुरू कर दिये गये हैं।

 

इस वर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर निर्णय लिया गया है कि खादी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये 7 एम्पोरियम पी.पी.पी. मोड पर संचालित किये जायेंगे। माटी कला शिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिये पुरस्कार योजना की राशि भी दोगुनी कर दी गई है।

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