मध्य प्रदेश में सुशासन

good governance in madhya pradesh

सामान्य तौर पर लोकतंत्र को जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा प्रशासन माना जाता है। लेकिन पिछले कई दशकों से इस अवधारणा में अनेक विसंगतियां घर कर गई हैं। इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की शुरूआत हुई। अब लोकतंत्र में जनता के हित को सर्वोपरि रखते हुए, प्रशासन के प्रति सरकार की जवाबदेही और इसमें पारदर्शिता को  अधिक महत्व दिया जाने लगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सक्षम और प्रभावकारी हो सकी। इसी बेहतर प्रशासन व्यवस्था को सुशासन नाम दिया गया है। मध्यप्रदेश में सुशासन की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। इससे लोगों का शासन—प्रशासन के प्रति भरोसा बढा है।

लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी देने वाला पहला प्रदेश

सबसे पहले मध्यप्रदेश में लोगों को शासकीय सेवाएँ और सुविधाएँ आसानी से देने के लिये सुशासन की व्यवस्था को मजबूत किया गया। सिटीजन चार्टर की अवधारणा को कानूनी रूप देकर देश और दुनिया का संभवत: पहला मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम-2010 लागू किया गया। इस अधिनियम को इतनी लोकप्रियता मिली कि इसे अनेक प्रदेशों ने लागू किया। इस कानून को संयुक्त राष्ट्र संघ ने लोक सेवा प्रदाय की श्रेणी में पुरस्कृत किया।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम और इसके सफल क्रियान्वयन के लिये प्रदेश को वर्ष 2013 में स्कॉच अवार्ड और वर्ष 2014 में स्टेट ई-गवर्नस अवार्ड भी प्राप्त हो चुके हैं। अब तक आम जनता से जुड़े 23 विभाग की 164 सेवाओं को इस अधिनियम के दायरे में लाया गया है। वर्तमान में इनमें से 110 सेवाओं के आवेदन ऑनलाइन लिये जा रहे हैं। अभी तक 3 करोड़ 96 लाख से अधिक आवेदन ऑनलाइन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 3 करोड़ 88 लाख का निराकरण किया जा चुका है।

अधिनियम में अधिसूचित प्रत्येक सेवा प्रदाय करने के लिये समय-सीमा निर्धारित की गई है। समय-सीमा में सेवा प्रदाय न करने वाले शासकीय सेवक पर जुर्माना किया जाता है और जुर्माना राशि संबंधित आवेदक को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाती है।

लोक सेवा प्रदाय प्रणाली को और अधिक बेहतर बनाने के लिये पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप में प्रत्येक विकास खंड मुख्यालय एवं शहरी क्षेत्रों में कुल 413 लोक सेवा केन्द्र राज्य में स्थापित किये गये हैं। इन केन्द्रों का मुख्य उददेश्य लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010 के तहत सेवा प्राप्त करने के लिये मार्गदर्शन देना, सेवा प्रदाय करने के लिये आवेदन प्राप्त करना एवं आवेदन पर लिये गये निर्णय आदि की जानकारी आवेदक को उपलब्ध करवाना है, जिससे कि नागरिकों को सेवा प्राप्त करने के लिये शासकीय कार्यालय नहीं जाना पड़े।

जन शिकायत निवारण

जन-शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना के लिये मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्प लाइन, समाधान ऑनलाइन, समाधन एक दिन, जन-सुनवाई, लोक कल्याण शिविर और मुख्यमंत्री पंचायत-महापंचायत का आयोजन कर जनता से सीधे जुड़ कर उनकी समस्याओं का निराकरण किया।

सुराज मिशन के तहत प्रशासन को और अधिक जनोन्‍मुखी तथा संवेदनशील बनाने के प्रयासों में भी राज्य सरकार काफी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर शुरू मंथन कार्यशाला, मुख्यमंत्री समाधान ऑनलाइन, जनदर्शन, मुख्यमंत्री निवास में पंचायतों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्ग से संवाद के बाद समस्याओं का निराकरण तथा नये कार्यक्रमों की शुरूआत, जिला कार्यालयों में समाधान एक दिन में योजना, विकासखंड स्तर पर लोक कल्याण शिविरों का आयोजन जैसे अभिनव कार्यक्रमों से प्रशासन जनता के अधिक निकट पहुँचा है। इससे समस्याओं के निराकरण में तेजी आई है।

 सी.एम. हेल्प लाइन

जन शिकायतों के निवारण के लिये मुख्यमंत्री श्री ‍िशवराज सिंह चौहान ने सी.एम. हेल्प लाइन 181 के रूप में अभिनव पहल की है। यह कॉल-सेन्टर रोजाना सुबह 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक काम करता है। नागरिक इस कॉल सेन्टर के टोल फ्री नम्बर पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करवाने के साथ शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त करते हैं।

इस वर्ष सितम्बर माह तक हेल्प लाइन के जरिये लगभग 4 करोड़ शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। इसमें प्रतिदिन लगभग 40 हजार कॉल प्राप्त कर संबंधितों को निराकरण के लिये भेजी जाती हैं।

पंचायत-महापंचायत

समस्याओं के निराकरण तथा नीतियों और विकास योजनाओं के निर्माण के लिये संबंधित वर्गों से संवाद स्थापित करने के लिये मुख्यमंत्री निवास में पंचायतों का आयोजन शुरू किया गया। अब तक दो महिला पंचायत, किसान, आदिवासी, वन, अनुसूचित-जाति, कोटवार, लघु उद्यमी, खेल, शिल्पी एवं कारीगर, नि:शक्तजन, दो मछुआ, मंडी हम्माल-तुलावटी, स्वैच्छिक संगठन, शहरी घरेलू कामकाजी महिला, साइकिल रिक्शा एवं हाथ ठेला, विद्यार्थी, फेरीवालों, वृद्धजन, वकील, युवा, केश-शिल्पी, चर्म-शिल्पी, मजदूर, कारीगर, बाँस-शिल्पी, विमुक्त घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ जाति पंचायत हुई हैं।

साथ ही खेतिहर श्रमिक सम्मेलन, लोकतंत्र के प्रहरियों (मीसाबंदियों), सामान्य निर्धन वर्ग, निर्माण श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों का सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। किसान महापंचायत, चालक-परिचालक और त्रि-स्तरीय महापंचायत का भी आयोजन किया गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री निवास में पुन: विद्यार्थी पंचायत भी होने जा रही है।

मुख्यमंत्री निवास पर कमजोर और वंचित तबकों की पंचायत आहूत कर उनकी समस्याओं की जानकारी लेना और उन्हीं के सुझाव पर उनके कल्याण की योजनाएँ बनाकर उन पर अमल करना संभवत: विश्व की अब तक की सबसे बड़ी और अनूठी प्रजातांत्रिक कवायद है जिसमें शासन के सैकड़ों नीतिगत निर्णय आम आदमी ने तय किये हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने लोक को तंत्र का पिछलग्गू नहीं रहने दिया गया बल्कि उसने तंत्र के स्वरूप और स्वभाव को उसकी दिशा और गति को निर्धारित किया।

जन-दर्शन

जनदर्शन कार्यक्रम के तहत इसी जनशक्ति का इस्तेमाल योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिये हुआ। लोक ने यदि तंत्र की शिकायत की तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाये गये क्योंकि मुख्यमंत्री के लिये जनवाणी ही देववाणी है।

सुशासन संस्थान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर देश के पहले अनूठे अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की स्थापना की गयी है। यह संस्थान राज्य शासन की बेस्ट प्रेक्टिसेस एवं नवाचारों का विस्तार सुनिश्चित कर रहा है। संस्थान वैश्विक और स्थानीय, दोनों संदर्भ में सरकार के लिये थिंक टैंक के रूप में काम कर रहा है।

संस्थान द्वारा आईडियाज फॉर सी.एम. वेब पोर्टल का संचालन किया जा रहा हे। मुख्यमंत्री के ब्लॉग से सिटीजन कॉर्नर पर प्राप्त सुझावों पर समन्वय और मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिये प्रविष्टियों के कामों का भौतिक सत्यापन भी संस्थान द्वारा किया जाता है।

नई पहल

लोगों को सरकारी दफ्तरों में कई कामों के लिये अपने दस्तावेज नोटराइज्ड करवाने और विद्यार्थियों को अपने दस्तावेज राजपत्रित अधिकारियों से सत्यापित करवाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिये सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया है। उन्हें स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा दी गई है। इसके जरिये आवेदक अपना स्व घोषणा-पत्र भर सकता है। उसे स्टॉम्प खरीदने और नोटरी से प्रमाणित करवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

-भुगतान

मध्यप्रदेश में लगभग शत-प्रतिशत शासकीय भुगतान इलेक्ट्रॉनिक होने लगे हैं। केन्द्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक एग्रीगेशन एण्ड एनेलाइजर लेयर (-टॉल) पोर्टल में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के मामले में मध्यप्रदेश को गुजरात के बाद देश में दूसरे नम्बर पर रखा है। शासकीय कर्मचारी का डॉटाबेस संधारित किया जा रहा है। शासकीय सेवकों को सभी भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किये जा रहे हैं। साथ ही वेण्डर को भी भुगतान ई माध्यम से किया जा रहा है। इनमें ठेकेदार, सप्लायर और गैर-शासकीय व्यक्ति शामिल हैं। प्रदेश में साइबर ट्रेजरी की लोकप्रियता भी बढ़ी है।

सूचना संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से प्रशासन में पारदर्शिता आई है और लोगों को शासन की सेवाएँ ज्यादा आसानी से मिलने लगी हैं। इन सभी नवाचारी पहलों के चलते मध्यप्रदेश को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले है। मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है जिसे सुशासन के लिये सूचना प्रौद्योगिकी के सफल प्रयोग पर प्रधानमंत्री पुरस्कार मिले हैं।

समाधान ऑनलाइन

आम जनता से प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण की दृष्टि से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू किया गया। यह कार्यक्रम प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को होता है। कार्यक्रम के काफी उत्साहजनक परिणाम सामने आये हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ से नवम्बर 2016 तक कुल 2286 प्रकरण चयनित हुए हैं। इनमें 2163 आवेदन/शिकायतें निराकृत किये जा चुके हैं और शेष 123 में कार्यवाही प्रचलित है। इस प्रकार कार्यक्रम में शिकायत निराकरण का प्रतिशत 95 रहा है। समाधान ऑनलाइन की लोकप्रियता से विगत माहों में शिकायतों की संख्या तथा उनके निराकरण की संख्या बढ़ी है।

समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज होते ही एक यूनिक जन शिकायत नम्बर दिया जाता है, जो कि आवेदक के मोबाइल नम्बर पर एसएमएस के माध्यम से भेजा जा रहा है। नागरिकों को उनकी शिकायत, माँग या सुझाव का निराकरण होने पर भी उनके निराकरण संबंधी एस.एम.एस. प्राप्त हो रहा है। निराकरणकर्ता अधिकारी को भी प्रति सप्ताह उसके खाते का पूरा ब्यौरा एस.एम.एस. द्वारा उनके पंजीकृत मोबाइल नम्बर पर भेजा जा रहा है ताकि वो नवीनतम स्थिति से अवगत रहे।

समाधान पोर्टल

समाधान पोर्टल पर लिखित आवेदनों को डिजिटाइज कर ऑनलाइन अपलोड करने की सुविधा दी गई है। पोर्टल पर जिलावार, विभागवार वर्गीकरण कर जिला/राज्य/शासन स्तर पर भेजने की सुविधा है। इसमें राज्य शासन के सभी विभाग/उप विभाग का समावेश किया गया है। सी.एम. हेल्प लाइन में वर्गीकृत शिकायतों के प्रारूप के समान ही एकरूपता दी गई है। आवेदनों के प्राप्त होने के चलित सभी माध्यमों का वर्गीकरण और आवेदकों की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता का वर्गीकरण भी किया गया है। पुराने उपलब्ध सभी आवेदनों का नये पोर्टल में माइग्रेशन आवेदनों के माध्यम के आधार पर पृथक एडमिन वर्गीकरण किया गया है। माँग और सुझाव के लिये भी कार्रवाई दर्ज करने का प्रावधान और मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को प्राप्त एवं दर्ज आवेदन का पृथक-पृथक वर्गीकरण करने की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पोर्टल में ऑनलाइन आवेदन दर्ज करने, स्थिति जाँचने और पावती प्राप्त करने का प्रावधान भी रखा गया है।

सी.एम.हेल्प लाइन की तर्ज पर ऑफिसर लॉग-इन एवं निराकरण की सुविधा दी गई है। सी.एम. हेल्प लाइन एवं समाधान पोर्टल के लिये एक समान यूजर आई.डी. है। आवेदनों की स्केन कापी को पूर्णकालिक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। आवेदनों की स्केन कापी, आवेदन दर्ज करने के बाद सभी के लिये पोर्टल पर उपलब्ध है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में आम जनता की समस्याओं का निराकरण कर प्रदेश लगातार तेजी से सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्य सचिव की आमजन से भेंट

मुख्य सचिव द्वारा माह अक्टूबर 2013 से आमजन से भेंट कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इसमें मुख्य सचिव द्वारा प्रत्येक गुरुवार को जन-सामान्य से प्रत्यक्ष भेंट कर कुल 1338 समस्याएँ/ शिकायतें सुनी जाकर 828 शिकायतों को निराकृत किया जा चुका है।


 

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