मध्यप्रदेश के लिए कैसा रहा वर्ष 2015

वर्ष 2016 जहाँ एक ओर अनगिनत आशाएँ लेकर आ रहा है वहीं बीत रहा 2015 मध्यप्रदेश सरकार के ठोस कदमों और  उच्च-स्तरीय संवेदनशीलता के लिए याद रहेगा। वर्ष 2015 निश्चित रूप से राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में उत्प्रेरक साल साबित हुआ। यह घटनाप्रधान साल था। अल्प-वर्षा से क्षणिक उदासी का माहौल रहा लेकिन सक्रिय और संवेदनशील प्रशासन से इसका प्रभाव कम हो गया। फसल नुकसान से पीड़ित किसानों को तात्कालिक रूप से उठाये गये कदमों और प्रभावी उपायों से राहत मिली।

किसानों की हालत पर चिंता करने और समाधान खोजने के लिये राज्य विधानसभा का विशेष सत्र कई अर्थों में अभूतपूर्व सिद्ध हुआ। किसान समुदाय के पक्ष में धन जुटाने के प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इस प्रकार एक संसदीय इतिहास बना। एक और ऐतिहासिक क्षण आया नवम्बर माह में जब मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल के 10 वर्ष पूरे किये। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के सर्वाधिक लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड उनके नाम हो गया है।

अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम कर मध्यप्रदेश ने अपनी आयोजन क्षमता साबित कर दी है। वैश्विक महत्व के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरण संबंधी कार्यक्रमों के सफल आयोजन बड़ी उपलब्धि रही। दसवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन, जलवायु परिवर्तन, भारतीय मूल्य और जीवन, धर्म और मानव कल्याण और अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेले की वैश्विक स्तर पर चर्चा हुई। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के व्यक्तित्वों ने मध्यप्रदेश में उपस्थिति दर्ज की। पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को आम जनता का समर्थन मिला। प्रदेश भर में योग सत्र किए गए। नागरिकों ने  मध्यप्रदेश के 60वें स्थापना दिवस पर समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प लिया। पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव होना एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। महिलाओं में राजनीतिक नेतृत्व को प्रोत्साहित करने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के चलते 50 फीसदी जिला पंचायतों  में महिलाएँ अध्यक्ष के रूप में चुनी गईं।

दूरगामी परिणाम वाले फैसले

वर्ष 2015 में लिये गये फैसलों से राज्य के तेजी से विकास करने में आने वाली बाधाएँ दूर करने में मदद मिलेगी। सकारात्मक परिणाम आने वाले वर्षों में दिखाई देंगे। तेजी से बढ़ रही आबादी के लिए डॉक्टरों की आवश्यकता को देखते हुए दतिया और खंडवा में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला महत्वपूर्ण है। विदिशा, रतलाम और शहडोल में मेडिकल कॉलेज के खुलने से भी स्वास्थ्य सुविधा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। करीब 18 लाख किसान को 5500 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने के निर्णय से बिजली बिलों का भुगतान करने में राहत मिलेगी।

            आँगनवाड़ी और प्राथमिक शालाओं के बच्चों को एक सप्ताह में तीन दिन स्वादिष्ट दूध मिलना शुरू हो गया है। बच्चों में कुपोषण से निपटने के लिए यह एक सशक्त पहल है। अटल शहरी कायाकल्प और परिवर्तन मिशन - अमृत में 32 शहर को शामिल करने से शहरी अधोसंरचना विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा। बाबा साहेब अंबेडकर राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा देने के निर्णय से सामाजिक विज्ञान में शैक्षिक अनुसंधान और उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण संस्थान के रूप में उभरने में मदद मिलेगी। महिलाओं के हाथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक तिहाई दुकानों का संचालन देने, प्रत्येक ग्राम पंचायत में उचित मूल्य की दुकान खोलने के निर्णय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

विदेश में रह रहे भारतीयों को राज्य के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अप्रवासी भारतीय विभाग की स्थापना मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही राज्य में अब विभागों की संख्या 64 हो गई है। किसानों को निश्चित आय के लिए राज्य की नई फसल बीमा योजना पर चर्चा ने समूचे राष्ट्र का ध्यान आकृष्ट किया।

महत्वपूर्ण नीतियाँ

वर्ष 2015 दो प्रमुख नीति की घोषणा के लिए जाना जाएगा। मध्यप्रदेश एनालॉग सेमी कंडक्टर फैब्रिकेशन निवेश नीति  से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग जगत द्वारा मेक इन इंडिया को मिल रहे समर्थन के संदर्भ में इस नीति का महत्व और भी बढ़ जाता है। रेत खनन नीति निश्चित रूप से बुनियादी ढाँचे के निर्माण की परियोजनाओं की गति देगी। इससे राजस्व आधार को मजबूत बनाने और खुले बाजार में कम दरों पर रेत की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद होगी। कृषि संकट के कारण और समाधान पर चर्चा के दौरान राज्य की कृषि वानिकी नीति की जरूरत पर जोर दिया गया था। नीति को तैयार करने के लिए कदम उठाये जा चुके हैं। केन्द्र की योजनाओं के बारे में सिफारिशें देने के लिए नीति आयोग की रिपोर्ट नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण पड़ाव था। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह रिपोर्ट सौंपी। इन प्रयासों से नीतिगत सुधार लाने में 2015 की महत्वपूर्ण भूमिका साबित होगी।

संकट में मदद

राज्य के इतिहास में किसानों को 2015 की तरह कभी भी कृषि संकट का सामना नहीं करना पड़ा।  किसानों को खरीफ की फसल का भारी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार की ओर से तत्काल राहत की घोषणा हुई । कृषक समुदाय को अधिकतम लाभ देने के लिए फसल नुकसान के आकलन के मानदंडों को भी शिथिल किया गया। ऋणों की वसूली और बिजली के बिलों का भुगतान स्थगित कर दिया गया। राहत और फसल बीमा राशि सहित करीब 8000 करोड़ किसानों को दिये जा रहे हैं। पूरी सरकार दु:ख के क्षणों में गाँव-गाँव पहुँची। वरिष्ठ आईएएस आईएफएस और आईपीएस अधिकारी ने समूह बनाकर दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया और पीड़ित किसानों से मुलाकात की। किसानों के सुझाव लिये और जमीनी स्तर पर प्रमुख योजनाओं के प्रभाव की समीक्षा की। विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने कृषि मंथन  में भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। किसानों के पक्ष में कई महत्वपूर्ण निर्णय और सुरक्षात्मक उपायों की घोषणा हुई। बागवानी फसलों के निर्यात और कृषि को बढ़ावा देने के लिए संस्था का गठन, सौर पंप पर सब्सिडी देने और हर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने, स्थायी बिजली कनेक्शन देने,  कृषि वानिकी नीति बनाने जैसे महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा हुई।

पुरस्कार-प्रशंसा

त्वरित पुलिस सहायता के लिए  भारत की पहली डायल 100 योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इसे स्मार्ट पुलिसिंग के लिये अभिनव पहल माना गया। मुख्यमंत्री की अमेरिका यात्रा मध्यप्रदेश को आदर्श निवेश स्थल के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हुई। इसी तरह, जापान और कोरिया की यात्रा में मिले निवेश प्रस्तावों को देखते हुए यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।

नई दिल्ली में प्रतिष्ठित इंडिया टुडे कॉनक्लेव में मध्यप्रदेश की कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा हुई। इकानॉमिक टाइम्स के तीसरे इन्फ्रा फोकस समिट में मध्यप्रदेश को प्रभावी ढंग से अधोसंरचना निर्माण में सबसे तेजी से बढ़ते राज्य के रूप में पहचान मिली। खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने के लिए केन्द्र ने मध्यप्रदेश की सराहना की।

होशंगाबाद जिले को विकलांग व्यक्तियों के आर्थिक पुनर्वास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। श्रम विभाग के श्रम सेवा पोर्टल को कम्प्यूटर सोसायटी आफ इंडिया का पुरस्‍कार मिला। पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रदेश को एक साथ 6 राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठापूर्ण पुरस्कार राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में प्रदान किये। पर्यटन के समग्र विकास के लिए मध्यप्रदेश को द्वितीय पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ विरासत शहर का पुरस्कार ग्वालियर को मिला। बी. श्रेणी के पर्यटक स्थलों में जन-सुविधा प्रबंधन में खरगोन जिले की महेश्वर नगर परिषद को पहला, पर्यटकों के लिए अनुकूल रेलवे स्टेशन का पुरस्कार हबीबगंज को, बेस्ट मेंटेन्ड डिसेबल्ड फ्रेंडली मान्यूमेंट भोजपुर के शिव मंदिर को, मोस्ट इनोवेटिव एण्ड यूनिक टूरिज्म प्रोजेक्ट का गौरव पर्यटन विकास निगम की इकाई सैरसपाटा भोपाल को हासिल हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में इस वर्ष पर्यटन के अनुकूल वेबसाइट और उत्कृष्ट पारिस्थितिकी पर्यटन स्थल होने के दो राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार और मिले। यह पुरस्कार हाल ही में पुणे में सम्पन्न इंदिरा इंटरनेशनल ट्रेवल मार्ट को मिले। बाल विवाह को रोकने के लिए लाडो अभियान और नागरिक केन्द्रित प्रशासन के लिए लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था को केंद्र सरकार की प्रशंसा मिली।

 

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