मप्र शासन की फ्लेगशिप योजनाएँ
flagship schemes
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। योजना 3 सितम्बर 2012 को रामेश्वरम् की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई।
तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है।
मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना
गरीब परिवारों को महँगाई की मार से राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल 2008 से शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को नया स्वरूप दिया गया है। जून 2013 से लागू नये स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है। वर्तमान में लगभग 18 लाख अंत्योदय और 56 लाख बीपीएल परिवारों को मिलाकर प्रति परिवार पाँच सदस्य के मान से करीब 3.5 लाख लोगों अर्थात् प्रदेश की आधी आबादी नये स्वरूप में गेहूँ एक रुपये किलो तथा चावल 2 रुपये किलो के मूल्य पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में साथ ही एक रुपये किलो की दर से आयोडीनयुक्त नमक भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने इन परिवारों को रियायती दर पर साढ़े तेरह रुपये किलो के हिसाब से दी जाने वाली शक्कर की आपूर्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना
ग्रामीण क्षेत्र में सामान्य क्षेत्र के पांच सौ और आदिवासी क्षेत्र के 250 से कम आबादी वाले राजस्व ग्रामों में ग्राम सड़क बनाने के लिये वर्ष 2010-11 से मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत 2013 तक ऐसे सभी ग्रामों के बारहमासी सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य है। से ग्राम प्रधानमंत्र ग्राम सड़क योजना के दायरे में नहीं आते हैं। तीन चरणों में 19 हजार 386 कि.मी. ग्रेवल सड़के बनाई जायेगी। इस कार्य पर 3294 करोड़ रूपये खर्च होगा। प्रथम चरण में 27820 सड़कों तथा 11954 पुल-पुलियों को स्वीकृति दी गई है।
इस योजना से ऐसे छोटे गांवों में बारहमासी सड़के बन रही है जो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के दायरे में नहीं आते। इन सड़कों के बनने से इन गांव का जनजीवन सुधार रहा है और वहां विभिन्न प्रकार की सामाजिक और आर्थिक विकास गतिविधियों को बल मिला है।
मुख्यमंत्री पेयजल योजना
ग्रामीण क्षेत्रों में लागू इस योजना का उद्देश्य ऐसे गाँवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है। जहां की जनसंख्या एक हजार से कम और पाँच से अधिक हो और वहां पेयजल की कोई सुविधा उपलब्ध न हो। योजना के तहत प्रदेश के 1500 गाँव में पाँच करोड़ रूपये की लागत से 1200 से अधिक पेयजल स्त्रोत विकसित किये जा रहे हैं। आगामी वर्षों में 13 हजार से अधिक गाँवों में सतही पेयजल योजनाएं बनाई जायेंगी।
मुख्यमंत्री पेयजल योजना के क्रियान्वयन की दिशा में सभी जिलों में जिला स्तरीय पेजयल समीक्षा समिति की बैठक में एक हजार 482 गाँवों के लिये लक्ष्य से 200 अधिक 1 हजार 207 पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं जिन पर क्रियान्वयन भी शुरू हो गया है।
इस योजना से ऐसे छोटे गांवों में पेयजल के साधन उपलब्ध हो रहे है जहां कोई साधन नहीं था।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/ परित्याक्ता के विवाह के लिये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है। इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो। पूर्व में इसके तहत 6500 रूपये की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये तथा एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिये दी जाती थी। अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया या है। इसमें नौ हजार रूपये कन्या की गृहस्थी के लिये और एक हजार रूपये सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिये है।
भारतीय समाज में कन्या के विवाह की चिन्ता हर गरीब परिवार में विशेष रूप से बहुत होती है। उनके पास अपने रोजमर्रा के खर्च की पूर्ति के लिये ही पर्याप्त पैसा नहीं होता , तो वे बेटी की शादी के लिये एक मुश्त खर्च जुटाने के लिये कर्ज का सहारा लेते है या कोई चीज बेचते हैं। गरीब परिवारों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर यह योजना शुरु की गई। इस योजना में सामूहिक विवाह किये जाते हैं जिससे आपसी सद्भाव भी बढ़ता है और शादियों पर अनावश्यक होने वाले खर्च पर भी रोक लगती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है। ऐसे आयोजनों में हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं जिससे सम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है।
मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना
इसका उद्देश्य खेतिहर मजदूरों तथा उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधारने के साथ ही उन्हें जरूरत अथवा मुसीबत के वक्त सुरक्षा प्रदान करना है।
योजना के तहत राज्य के 18 से 60 वर्ष आयु के खेतिहर मजदूरों के परिवार की स्त्री को प्रसूति व्यय और छः सप्ताह की मजदूरी का भुगतान , पति को पितृत्व अवकाश के साथ दो सप्ताह की मजदूरी का भुगतान , बच्चों को पहली कक्षा से स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिये छात्रवृत्ति , पांचवीं कक्षा तथा उसके आगे तक प्रथम श्रेणी में पास करने वाले विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार। विवाह सहायता योजना के तहत कन्याओं को मदद तथा आम आदमी बीमा योजना के अंतर्गत लाभ दिये जाते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक को निर्धारित प्रारूप में ग्राम पंचायत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद उसे फोटोयुक्त परिचय पत्र दिया जाता है। जिसके आधार पर वह उपरोक्त सभी लाभ प्राप्त करता है।
असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के साथ हमेशा यह विडंबना रही है कि कोई भी संगठन या परेशानी आ जाने पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होती। बीमार पड़ने अथवा घर में बच्चा होने जैसे अवसरों पर उन्हें बहुत अधिक आर्थिक कष्ट झेलना पड़ता है क्योंकि वे काम पर नहीं जा पाते। साथ ही वह अपने बच्चों को भी पैसे के अभाव में ठीक से पढ़ा भी नहीं पाते। इस योजना के क्रियान्वयन में इन मजदूरों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा मिली।